गुस्सा शायरी [ Anger Shayari ]


हैलो दोस्तों, इस पोस्ट में गुस्से पर लिखी हुई हिन्दी  शायरी है। आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हो।

 वैसे हर इंसान को गुस्सा आता है , जिसके कारण अलग-अलग हो सकते है, जैसे किसे के धोखे का, झूठ और बेवफ़ाई का, जख्म, दर्द दुख का, कुछ लोगों की गलतियो का, इसी तरह और भी कारणों पर आनेवाले गुस्से को इस पोस्ट में मैन शायरी में लिखा है। जिसे पढ़ने के बाद आपको यह पोस्ट जरुर पसंद आएगी।

दोस्तो हमारे Youtube Channel में Upload किया हुआ यह Anger shayari video भी जरुर देखना

अगर आप गुस्से पर कोट्स पढना चाहते हो तो यह पोस्ट भी जरूर पढना

गुस्सा शायरी [ Anger Shayari ]:



कुछ रिश्ते-


Anger Shayari
Anger Shayari 


कुछ रिश्तों को निभाना पड़ता है,
कभी-कभी गुस्से को भी निगलना पड़ता है।

Kuchh rishton ko nibhaana padata hai, kabhee-kabhee gusse ko bhee nigalana padata hai.
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गुस्सा था मुझमें, मै जीत गया-


जहाँ ताकत कम पड गईं,
हौसला कम पड गया,
वहाँ मै गया था,
गुस्सा था मुझमें, मै जीत गया।

jahaan taakat kam pad gaeen, hausala kam pad gaya, vahaan mai gaya tha, gussa tha mujhamen, mai jeet gaya.

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गुस्सा निकाल न सका-


Anger-shayari
Anger-shayari

रंज ही कुछ ऐसे, जी भरकर रो ना सका।
तनहा मै, किसी पर गुस्सा भी निकाल न सका।

ranj hee kuchh aise, jee bharakar ro na saka. tanaha mai, kisee par gussa bhee nikaal na saka.
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परशू' शायर नाम है मेरा-


माना कि गुस्सा
बहुत जल्दी आ जाता है
फिर भी क्या कसुर है मेरा...
मोहब्बत सभी से करता हूँ 
'परशू' शायर नाम है मेरा!!! 

maana ki gussa bahut jaldee aa jaata hai phir bhee kya kasur hai mera... mohabbat sabhee se karata hoon parashoo shaayar naam hai mera!!!

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गुस्से में कुछ लोग-


Anger-shayari
Anger-shayari

गुस्से में कुछ लोग बूरा बोलते है,
 पर उनके इरादे गलत नहीं होते।
 गलत भी बोलते है, 
पर उनके दिल काले नहीं होते।

gusse mein kuchh log boora bolate hai, par unake iraade galat nahin hote. galat bhee bolate hai, par unake dil kaale nahin hote.
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गुस्से पर दुख भरी शायरी [ Sad Anger Shayari ]:



क्या बताऊ के... क्या हूँ मै-


Sad-anger-shayari
Sad-anger-shayari

क्या बताऊ के... क्या हूँ मै?
जो ठीक से जली नहीं
और बुझी भी नहीं,
वो सीने की...आग हूँ मै।।।

kya bataoo ke... kya hoon mai? jo theek se jalee nahin aur bujhee bhee nahin, vo seene kee...aag hoon mai...
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आज गुस्सा ही गुस्सा-


जला दूँ की फेंक दू
दिक्कत ही बेइंतहा हैं
तोड़ दूँ की फोड़ दूँ
आज गुस्सा ही गुस्सा है 

jala doon kee phenk doo dikkat hee beintaha hain tod doon kee phod doon aaj gussa hee gussa hai

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पता नहीं किस बात से गुस्सा हूँ-


Sad-anger-shayari
Sad-anger-shayari


पता नहीं मै 
किस बात से इतना गुस्सा हूँ,
कितने दर्द है 
और कितना जख्मी हूँ?

pata nahin mai kis baat se itana gussa hoon, kitane dard hai aur kitana jakhmee hoon?
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कुछ लोगों की बदतमीजी-


वाह!!! क्या तहबीज होती है कुछ लोगों की, 
बातें जब भी करते है, बदतमीजी की।

Vah kya tahabij hoti hai kuchh logon ki 
Bate jab bhi karate hai badatamiji ki

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चलो आज हम कुछ और लूटा देते है-


Sad-anger-shayari
Sad-anger-shayari

चलो आज हम
कुछ और लूटा देते है,
लोगों से नहीं,
खुद के गुस्से से मार खाते है।

Chalo aaj ham kuchh aur luta dete hai 
Logon se nahi khud ki tanhai se mar khate hai 
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अपने मेरी इंतहा लेते है-


पता नहीं मेरे अपने मेरी इंतहा कयो लेते है?
उन्हें पता है मुझे गुस्सा...बर्दाश्त नहीं होता,
फिर भी खुद ही खुद की नजरों से मुझे, गीरा देते है।

Pata nahi mere apane meri intaha kyun lete hai 
Unhe pata hai muze gussa bardasht nahi hota 
Fir bhi khud hi khud ki najaron se muze gira dete hai


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